फतेहपुर, अप्रैल 17 -- मलवां। छह दिन का लंबा इंतजार, दो जगह से पैर में फ्रैक्चर और सिस्टम की बेरुखी...असोथर निवासी हस्ता बहादुर के लिए मेडिकल कॉलेज का अनुभव किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं रहा। बेहतर इलाज की उम्मीद में जिला अस्पताल से रेफर होकर आए मरीज को जब सरकारी सिस्टम से सिर्फ तारीखें मिलीं तो थक-हारकर परिजनों ने कर्ज और मजबूरी के बीच निजी अस्पताल का रुख किया। यह घटना बताती है कि बड़ी बिल्डिंगें और भारी-भरकम बजट के बावजूद आम आदमी आज भी बेहतर इलाज के लिए भटकने को मजबूर है। हस्ता बहादुर 12 अप्रैल को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह भी पढ़ें- छह दिनों से मेडिकल कॉलेज में सिटी स्कैन ठप, मरीज बेहाल उनके पैर में दो जगह फ्रैक्चर हुआ था। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद बेहतर इलाज के लिए मेड...
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