गंगापार, अक्टूबर 11 -- मेजा खास में आयोजित की जा रही रामलीला के चौथे दिन धनुष यज्ञ का मंचन किया गया। राजा जनक का दरबार सजता है, जिसमें राजा के निमंत्रण पर धनुष तोड़ने के लिए देश विदेश से राजा दरबार में पहुंच गए। इन्हीं में एक राजा पेटहवा के पहुंचने पर सभी दर्शक उनकी कार्यशैली पर हंसने लगे। राजा जनक ने उपस्थित राजाओं को अपनी प्रतिज्ञा बताई। इसके बाद सभी राजा पहले तो बारी-बारी से धनुष को तोड़ने के लिए जाते हैं, जब धनुष को नहीं तोड़ पाते तो एक साथजोर लगाते हैं। इसके बाद भी जब धनुष नहीं टूटता तो राजा जनक अपनी प्रतिज्ञा को धिक्कारते हुए कहते हैं कि अब धरती पर कोई वीर नहीं बचा जो धनुष को तोड़ेगा। राजा के वचनों को सुन सभा में बैठे लक्ष्मण जोश में उठ बोलते हैं कि उनके भैया श्री राम हैं जो धनुष को तोड़ सकते हैं। श्री राम अपने गुरु की आज्ञा पाकर धनुष तो...
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