विकासनगर, अक्टूबर 7 -- जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट के बीच कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक एवं नवाचारी संरक्षण तकनीकों को अपनाना जरूरी है। माया देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी की ओर से मंगलवार को मृदा एवं जल संरक्षण में नवाचार विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और सतत कृषि प्रबंधन की जानकारी दी। मुख्य वक्ता आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अम्बरीश कुमार ने वर्षा जल संचयन, जलागम प्रबंधन, कुशल सिंचाई, मृदा में नमी संरक्षण, मृदा अपरदन नियंत्रण और संरक्षण कृषि की तकनीकों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संरक्षण उपाय अपनाने से भूमि क्षरण को रोकने के साथ कृषि उत्पादकता औ...