हिन्दुस्तान ब्यूरो, जुलाई 7 -- बिहार में मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अब अपने नाम से दाखिल-खारिज कराने के लिए वर्षों तक आवेदन देने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। अब राजस्व कर्मचारी स्वयं गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे। यह कर्मचारी सूचना के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू करेंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस बाबत सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और समाहर्ताओं को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसी भी परिवार को केवल जानकारी के अभाव या प्रशासनिक विलंब के कारण अपने वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं रहना पड़े। मृत रैयतों के नाम पर वर्षों तक जमाबंदी लंबित रहने से पारिवारिक विवाद, मुकदमे...