ललितपुर, अगस्त 10 -- ललितपुर। बीती देर रात्रि झमामझ बारिश के बाद सोमवार रुक-रुककर हो रही बरसात के चलते जनपद की रीती नदियों और नालों को पुनर्जीवन मिल गया। इनमें पानी ने रफ्तार पकड़ ली। हिलोरे मारती जलराशि पेयजल योजनाओं और फसलों की सिंचाई के पानी का इंतजाम भी कर रही है। इस मौसम का सभी लोग आनंद ले रहे हैं। बुंदेलखंड स्थित ललितपुर जनपद का आर्थिक चक्र खेतीबाड़ी से ही घूमता है। यहां साढ़े तीन हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी और खरीफ की बुआई होती है। जिसकी सिंचाई के लिए पानी बहुत जरूरी है। इस बार जून माह में सिर्फ 42.80 मिलीमीटर और जुलाई में 243.80 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी। दोनों महीनों में औसत से कम बरसात के चलते खेतों में तैयार हो रही सोयाबीन, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि फसलें प्रभावित हो गयी थीं। अगस्त के शुरुआती सप्ताह में भी बारिश न के बराबर होने से कि...