प्रयागराज, अप्रैल 6 -- प्रयागराज। घर का मुखिया इस दुनिया से रुख्सत हुआ तो जिंदगी की गाड़ी बेपटरी हो गई। परिवारवालों ने भी मुंह मोड़ लिया। चार बच्चे दाने-दाने को मोहताज हो गए। भविष्य तो दूर वर्तमान में जीवनयापन कठिन लग रहा था। सगे-संबंधी साथ छोड़ चुके थे। लेकिन, बेबसी और लाचारी साथ नहीं छोड़ रही थी। धीरे-धीरे जीने की उम्मीद खत्म हो रही थी। पर मासूम बच्चों के भविष्य की चिंता भी सता रही थी। आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया था। ऊहापोह के बीच एक उम्मीद की किरण तब जागी जब एक महिला फरिश्ते के रूप में आई। उसने अबला नारी और उसके चार मासूम बच्चों को दारागंज स्थित धनराज वृद्धाश्रम में सहारा दिया। यह कहानी है मेजा की रितु मिश्रा की।मेजा की रहने वाली रितु मिश्रा के पति गिरीश गुजरात में नौकरी करते थे। लंबी बीमारी के चलते एक साल पहले उनकी मौत हो गयी। रित...
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