नई दिल्ली, जून 19 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पूरे तीन माह 20 दिन तक चले पश्चिम एशिया संकट के दौरान तमाम बाधाओं के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने में सफल रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से खाड़ी देशों से कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हुई, लेकिन सरकार कच्चे तेल और एलपीजी की खरीद में विविधता लाकर इस संकट का मुकाबले करने में सफल रही। हालांकि, कुछ एहतियाती कदम जरूर उठाने पड़े।

होर्मुज का असर पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज बंद होने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई। भारत पर इसका सीधा असर पड़ा, क्योंकि कच्चे तेल का 40 फीसदी, एलएनजी का 60 प्रतिशत और एलपीजी के आयात का 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज से होकर गुजरता है। ऐसे में एलपीजी आपूर्ति पर सबसे ज्यादा असर हुआ और स्थिति नाजुक बन गई।

कितनी खपत देश में एलपीजी की...