जौनपुर, मई 23 -- जफराबाद, हिन्दुस्तान संवाद। मां शीतला धाम चौकिया में चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव में डॉ. मदन मोहन मिश्र ने कहा कि काम को ब्रह्मचर्य से जीता जा सकता हैं, लोभ को दान से जीता जा सकता है, क्रोध को शांति से जीता जा सकता है, मुझको अहंकार नहीं है यही अहंकार सबसे बड़ा अहंकार है और यही सबसे बड़ा घातक है। उन्होंने नारद मोह प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि व्यक्ति के पतन का मुख्य कारण अहंकार ही है। इसलिए हमें किसी का अहंकार नहीं करना चाहिए बल्कि जो भी उपलब्धियां प्राप्त है उसमें परमात्मा की कृपा का दर्शन करना चाहिए। यह भी पढ़ें- अहंकार से होता रहा है हमेशा विनाश - प्रमोद कृष्ण मनु सतरूपा प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि पति और पत्नी में सामंजस्य हो तो बेटे का बेटा ध्रुव भक्त बनकर और बेटी का बेटा कपिल भगवान बनकर घर में ही आ जाते हैं। राजा...