मुंगेर, मार्च 27 -- ​मुंगेर, निज संवाददाता। ​आधुनिकता की चकाचौंध और अंग्रेजी दवाओं के बढ़ते बाजार के बीच मुंगेर में प्राचीन 'देशी चिकित्सा पद्धति' (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) प्रशासनिक उपेक्षा की आईसीयू में है। विडंबना देखिए कि जो चिकित्सा पद्धति जड़ से बीमारी खत्म करने के लिए पूरी दुनिया में सराही जा रही है, वह मुंगेर में खुद 'अस्तित्व विहीन' होने की कगार पर है। पिछले 45 वर्षों से जिला संयुक्त औषधालय एक जर्जर किराए के मकान में सांसें ले रहा है, जिसे न तो अपना भवन नसीब हुआ और न ही काम करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी।​कर्मचारियों का 'सूखा': न कंपाउंडर, न चतुर्थवर्गीय कर्मीः​मुंगेर के इस औषधालय की बदहाली का सबसे काला अध्याय इसकी रिक्तियां हैं। जानकारी के अनुसार, यहां के तीन प्रमुख विभागों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) में से एक में भी न...