भभुआ, जनवरी 3 -- शहर से लेकर गांवों तक की मिलों में नई उपज से लोग कुटवा रहे हैं चूड़ा सोनम, गोविंदभोग, कतरनी धान का चूड़ा कुटने का देर रात तक चल रहा दौर (पेज चार) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। अब शहर व गांव की मिलों से सोनम, गोविंदभोग व कतरनी प्रभेद के धान से चूड़ा कुटवाने वालों की कतार लग रही है। इसलिए देर रात तक मिलों से खटखट की आवाज आ रही है। चूड़ा की सोंधी महक गलियों से होकर सड़कों पर फैल रही है। मकर संक्रांति यानी 'खिचड़ी' का पर्व चंद दिन रह गए हैं। इस पर्व पर दही-चूड़ा-गुड़ खाने की परंपरा रही है। कुछ लोग चूड़ा के साथ तिलवा, तिलकुट, ढूंढा भी खाते हैं। इन चीजों का जरूरतमंदों के बीच दान करने का भी रिवाज है। इस पर्व की सबसे अहम परंपरा बेटी-बहुओं के घर 'खिचड़ी' पहुंचाने की है। मकर संक्रांति पर्व से पहले घर के लोग मायके में रह रही बहू व ससुराल में रहने...
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