नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- अमेरिका और ईरान के बीच कायम नाजुक युद्धविराम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमता को भले ही कमजोर कर दिया हो, लेकिन सत्ता परिवर्तन, परमाणु कार्यक्रम समाप्ति और मिसाइल क्षमता में भारी कमी जैसे प्रमुख उद्देश्य अधूरे रह गए। क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर संदेह बना हुआ है। इन सवालों के बीच इंडिया टुडे से बात करते हुए इजरायल के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ( NSA ) प्रोफेसर चक फ्रीलिच ने कहा कि युद्ध सैन्य रूप से सफल रहा, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से विफलता मानी जा सकती है।फिलहाल युद्धविराम काफी समस्याग्रस्त है एक सवाल के जवाब में प्रो चक फ्रीलिच ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो गई है, यही सैन्य सफलता है। समस्या यह है कि युद्ध शुरू होने पर...
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