पूर्णिया, नवम्बर 5 -- बनमनखी, संवाद सूत्र। मिथिला का पारंपरिक लोक पर्व सामा-चकेवा बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। महिलाएं पारंपरिक गीत गाकर भाई-बहन के अटूट प्रेम का यह पर्व मना रही हैं। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी से पूर्णिमा तक चलता है। सामा भगवान श्रीकृष्ण की पुत्री थीं जिन्हें श्राप मिला था। उनके भाई साम्ब ने तपस्या करके उन्हें श्राप से मुक्त कराया। इस पर्व में सामा, चकेवा आदि की मूर्तियां बनाई जाती हैं और चुगला का मुंह जलाया जाता है। इस पर्व को लेकर प्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा द्वारा गाए पारंपरिक सामा चकेवा गीत सामा खेले चलली भौजी संग सहेली हो, हो भैया जिबय हो ओ जुग-जुग जिबय हो... आदि सामा चकेवा के पारंपरिक गीतों से गांव की गलियां गुलजार हो रही है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलता है। कार्...