मधुबनी, मार्च 21 -- मधुबनी । कहते हैं कि रेल की पटरियां केवल लोहे की कड़ियां नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का जरिया होती है। मिथिला और कोशी-सीमांचल को जोड़ने वाली सकरी-झंझारपुर-निर्मली रेल लाइन के लिए यह बात शिद्दत से लागू होती है। दशकों के इंतजार और 1934 के विनाशकारी भूकंप के बाद टूटे संपर्क को बहाल करने का सपना साल 2019 में बड़ी लाइन बिछाने के साथ पूरा तो हो गया, लेकिन आज पांच साल बाद भी यह रेलखंड अपनी उपयोगिता के विस्तार का इंतजार कर रहा है। लाखों प्रवासियों की आंखों में जो चमक 2019 में दिखाई दी थी। वह अब धुंधली पड़ती जा रही है। इसका कारण है कि प्रवासियों के लिए दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीधी और नियमित पहुंच अब भी चुनौती बना हुआ है। व्यापारियों से लेकर प्रवासियों तक की एक ही शिकायत है कि उन्हें आवागमन के लिए परेशानी अ...