कन्नौज, मार्च 31 -- कन्नौज। नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के विराम दिवस पर कथा व्यास विनय कृष्ण महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वेदज्ञ और संतोषी व्यक्ति कभी दरिद्र नहीं होता तथा सच्ची मित्रता में कभी भेदभाव नहीं होता। गुग़रापुर चित्तरपुरवा स्थित कथा स्थल पर उन्होंने बताया कि गुरु संदीपन के आश्रम में अध्ययन के दौरान श्रीकृष्ण और सुदामा के बीच गहरी मित्रता स्थापित हुई थी। एक ओर सुदामा निर्धन थे तो दूसरी ओर श्रीकृष्ण राजपरिवार से जुड़े थे, लेकिन दोनों के संबंधों में कभी अंतर नहीं आया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल से शिक्षा पूर्ण करने के बाद सुदामा ने सादगी और संतोष का जीवन अपनाया, जबकि श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने। इसके बावजूद दोनों की मित्रता आदर्श बनी रही। महाराज ने बताया कि पत्नी के आग्रह पर सुदामा द्...
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