मिट्टी की सेहत पर हर साल 20 करोड़ के माइक्रोन्यूट्रिएंट की खपत
मोतिहारी, जुलाई 26 -- मोतिहारी। पूर्वी चम्पалтын की मिट्टी पहले सोना उगलती थी। न तो रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती थी और न उपज बढ़ाने के लिए किसी टॉनिक की। सिर्फ गोबर खाद व कंपोस्ट से खेत में लगी फसल लहलहाती रहती थी। लेकिन आबादी की रफ्तार के साथ अनाज की बढ़ती जरूरत के कारण खेत में रासायनिक खाद की खपत बढ़ती चली गयी। इससे मिट्टी की सेहत बिगड़ते चले जाने से माइक्रोन्यूट्रिएंट (सूक्ष्म पोषक तत्व) की कमी होती चली गयी। लिहाजा मिट्टी में मौजूद जिंक, कॉपर, आयरन, बोरान व मैंगनीज जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट की मौजूदगी में बड़ी मात्रा में जिंक व बोरान की कमी पाई गई है। इसका खुलासा जिला मिट्टी जांच प्रयोगशाला में मिट्टी नमूनों की जांच से हुआ है। किसानों को जारी किये जाने वाले मृदा स्वास्थ्य कार्ड में इन दो सूक्ष्म तत्वों की भारी कमी से फसल उत्पादन पर ग्रहण ...
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