झांसी, जून 2 -- झांसी। यदि धरती पुत्र मिट्टी की उर्वरा शक्ति में इजाफा करना चाहते है तो मौका है अभी जून के आखिर में ढेंचा की बुआई कर दें और इसके जुलाई में प्राप्त करने पर इसे मिट्टी में मिला दें। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति में इजाफा होगा। यह नत्रजन की भरपूर उपलब्धता करा देता है। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसानों को हरी खाद के रूप में ढेंचा की खेती अपनाने की सलाह दी है। इसे दलहनी फसलों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। ढेंचा की खेती मध्य जुलाई तक हरी खाद के उद्देश्य से की जा सकती। इसकी बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पक्ष तक उपयुक्त रहती.

हरी खाद के लिए ढेंचा की बुवाई हरी खाद के लिए ढेंचा की बुवाई में 18 से 20 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है, जबकि बीज उत...