मोतिहारी, अप्रैल 30 -- बंजरिया। सरकारी दावों के बावजूद मजदूर रोजगार के लिए वे पलायन करने को विवश रहते हैं। गांव से शहर की ओर रोजगार की तलाश में आते हैं, लेकिन काम नहीं मिलने पर निराश होकर घर वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। जब शहर में भी काम नहीं मिलता तो घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर परदेश जाकर दिहाड़ी करने को विवश होते हैं। इसके बावजूद दिहाड़ी मजदूरों के लिए सरकारी योजनाएं धरातल पर नहीं उतरती। मजदूरों को रोजगार गारंटी योजना फाइलों में दबकर रह जाती है। माह में 15 दिन काम मिल जाय तो बहुत है। इसी से जिले के श्रमिकों के रोजगार के लिए उठाए गये सरकारी आदेशों की जमीनी हकीकत सामने आती रहती है। यह भी पढ़ें- मई दिवस पर विशेष: गुरबत की मार झेल रहे मजदूरों का हाल बेहाल काम की तलाश आए दिन हर चौक चौराहे पर सुबह से दिहाड़ी की तलाश में आए सैकड़ों की संख्य...
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