सहारनपुर, फरवरी 20 -- रमजानुल मुबारक में रोजे के बाद दूसरी अहम इबादत नमाजे तरावीह है। तरावीह की नमाज की बड़ी फजीलत है, जिसके लिए बेशुमार रिवायतों में रोजे और तरावीह का जिक्र एक साथ किया गया है। हदीस में रमजानुल मुबारक में रोजा रखने के साथ-साथ तरावीह पढ़ने की खास महत्ता बताई गई है। दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर मसूदी ने माह-ए-रमजान में तरावीह की नमाज की महत्ता बताते हुए कहा कि फुकहा-ए-कराम ने इसकी तशरीह फरमाई है कि तरावीह की नमाज पढ़ना सुन्नते मुअक्कदा (आवश्यक)है। क्यांकि इसकी बीस रकआत पढ़ी जाती हैं। मौलाना अहमद खिलर मसूदी ने कहा कि सहाबा-ए-कराम, ताबईन, तबेताबईन, इमाम अबू हनीफा, इमाम शाफई, इमाम अहमद और एक कौल के मुताबिक इमाम मालिक रह. का मसलक भी यही है कि तरावीह की बीस रकआत हैं। मौलाना ने बताया कि पवित्र माह रमजानुल मुबारक के ...
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