नवादा, मार्च 12 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। रमजान का तीसरा अशरा 10 मार्च यानी मंगलवार की रात से शुरू हो गया। इस अशरा में रोजेदार गुनाहों की माफी के लिए अल्लाह-तआला की इबादत करते हैं। कहा जाता है कि इस अशरे में इबादत करने से जन्नत नसीब है। इसमें इबादत करने से लोगों के गुनाह माफ हो जाते हैं। अल्लाह भी इबादत करने वालों के लिए जन्नत के द्वार खोल देते हैं। इसी अशरे में एतकाफ भी किया जाता है, जो गुनाहों के माफ होने का एक बड़ा जरिया है। इस्लामिक स्कॉलर मौलाना जहांगीर आलम महजुरूल कादरी ने बताया कि 20वें रोजा की रात से तीसरा अशरा शुरू हो गया। रमजान में 20वें रोजे के मगरिब से शुरू होकर चांद की रात तक मस्जिद में रहकर अल्लाह की इबादत करने को एतकाफ कहते हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने दस दिनों का एतकाफ किया, उसने दो हज और दो उमरे के बराबर सवाब...
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