अलीगढ़, नवम्बर 12 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। हर मां-बाप की यही इच्छा होती है कि उनका बच्चा हंसता-खेलता, स्वस्थ और लंबी उम्र वाला जीवन जिए। मगर कई बार यह सपना निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी के कारण अधूरा रह जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाली मौतों का 14 प्रतिशत कारण निमोनिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रलाइज निमोनिया सक्सेसफुली (सांस) कार्यक्रम शुरू किया है। इसका उद्देश्य हर बच्चे को निमोनिया से सुरक्षा और स्वस्थ बचपन का अधिकार देना है। ठंडी हवा और प्रदूषण से जब फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं, तब सबसे ज्यादा खतरा उन मासूमों को होता है जो अभी जीवन की पहली सीढ़ी पर हैं। इन्हीं को सुरक्षित रखने की दिशा में सरकार ने 'सांस' कार्यक्रम ...