नई दिल्ली, जनवरी 30 -- नई दिल्ली, प्रभात कुमार। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में 'मासिक धर्म स्वास्थ्य' को मौलिक अधिकार करार दिया। साथ ही देश के सभी स्कूलों (चाहे सरकारी हों या निजी) में कक्षा 6 से 12 तक की सभी छात्राओं को निशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किशोर लड़कियों के लिए सभी स्कूलों में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति यानी 'स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति' को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने अपने 126 पन्नों के फैसले में कहा, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन के अधिकार का हिस्सा है। पीठ ने देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के...
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