नई दिल्ली, मई 19 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि 'मारो और भागो' जैसी हिंसक कार्रवाइयों को लोकतंत्र के किसी भी सिद्धांत के तहत विरोध का वैध तरीका नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने समाज के एक वर्ग द्वारा विरोध की आड़ में कथित तौर पर की जा रही अशांति फैलाने वाली गतिविधियों पर चिंता भी व्यक्त की। जस्टिस गिरीश कथपालिया की बेंच ने 16 मई के अपने आदेश में कहा कि हालांकि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन विरोध के नाम पर की गई हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।'मारो और भागो' जैसी हरकतें विरोध प्रदर्शन नहीं कहलातीं कोर्ट ने कहा कि हम फिर दोहराते हैं कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा हैं। लेकिन, विरोध के नाम पर की गई हिंसा को लोकतंत्र के किसी भी सिद्धांत के तहत स्वीकार नहीं किया जा सकता। 'मारो और भागो' जैसी हरकत...