नई दिल्ली, फरवरी 28 -- सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल की जांच करने के लिए सहमत हो गया है कि सरकारी नौकरी में आरक्षण प्राप्त करने के लिए एक विवाहित ओबीसी (OBC) महिला उम्मीदवार के 'क्रीमी लेयर' में आने का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा- उसके पति की आय पर या उसके माता-पिता की आय पर।पहले मामला समझिए टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कर्नाटक की एक महिला का है, जो न्यायिक अधिकारी (सिविल जज) बनना चाहती है। वह हिंदू नामधारी समुदाय से ताल्लुक रखती है, जो कर्नाटक में आरक्षण की II-A श्रेणी के अंतर्गत आता है। अप्रैल 2018 में, महिला की शादी हो गई। महिला का पति आरक्षण की III-B श्रेणी के अंतर्गत आता है। शादी के बाद से महिला अपने माता-पिता से अलग रह रही है। उसने सिविल जज के पद के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती में कुल 57 में से 6 पद...