वाराणसी, अप्रैल 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। संकटमोचन संगीत समारोह के 103वें संस्करण में साहित्य के मंच पर शुक्रवार को 'काशी में भक्ति' विषय पर परिचर्चा हुई। मंच पर मौजूद शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा आदि क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट लोगों ने अपनी-अपनी दृष्टि में पक्ष रखा। सत्र में संत कबीर से बाबा कीनाराम तक, बुद्ध के उपदेश से चार जैन तीर्थंकरों तक, गोस्वामी तुलसीदास से संत रविदास तक, भक्ति और इसकी धाराओं से जुड़े तथ्यों का प्रवाह हुआ। निष्कर्ष यह रहा कि श्रीराम चरित मानस विशुद्ध धार्मिक ग्रंथ नहीं है। यह सामाजिक चेतना के जागरण और सांस्कृति के संरक्षण के लिए लिखा गया ग्रंथ भी है।सत्र के मुख्य वक्ता प्रो.सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि रामानंद काशी आए, उन्होंने दक्षिण की जगह काशी का चयन क्यों किया। पांच हजार साल से पुरानी काशी है। इसकी महान सभ्...