नई दिल्ली, जनवरी 22 -- वैदिक ज्योतिष में केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। इसका कोई भौतिक रूप नहीं होता, लेकिन जीवन पर इसका प्रभाव बहुत गहरा और रहस्यमयी होता है। केतु मोक्ष, वैराग्य, अध्यात्म, पूर्व जन्म के कर्म और अचानक घटनाओं का कारक है। जब कुंडली में केतु मजबूत और शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को गहन आध्यात्मिक ज्ञान, तीव्र अंतर्ज्ञान और मोक्ष की ओर ले जाता है। लेकिन जब केतु कमजोर, पीड़ित या अशुभ ग्रहों से प्रभावित होता है, तो जीवन में असंतुलन, भ्रम और कष्ट बढ़ जाते हैं। कमजोर केतु के संकेत अक्सर अचानक और रहस्यमयी रूप में सामने आते हैं। मानसिक अस्थिरता से लेकर अजीब तरह की बीमारियां तक, ये संकेत समय रहते पहचान लेने चाहिए। आइए जानते हैं कमजोर केतु के प्रमुख लक्षण और इनसे बचाव के सरल उपाय।मानसिक अस्थिरता और भ्रम की स्थिति कमजोर केतु का ...