खगडि़या, अप्रैल 22 -- बेलदौर । एक संवाददाता बड़े भाग्य मानुष तन पावा। यानी मानव तन अनमोल रत्न है। यह बातें बुधवार को महिनाथनगर गांव में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के प्रथम दिन संबोधित करते हुए संतमत सत्संग के प्रधान आचार्य स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने बताई। मानव शरीर को अनमोल बताते हुए कहा कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद ही यह प्राप्त होता है। प्रवचन में प्रतिपाद का विषय मानव शरीर के बारे में बताते हुए कहा कि सभी जीवों से सुंदर सोचने, समझने वाला मानव रुपी शरीर है। इसे दुर्लभ बताते हुए कहा कि मानव शरीर से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। यह भी पढ़ें- मनुष्य को कर्मों के अनुसार मिलता है फल: स्वामी सत्यानंद उन्होंने इस शरीर से बुरा कर्म को छोड़कर अच्छाई को अपनाने पर बल दिया। मानव रूपी शरीर सुख भोगने के लिए नहीं बल्कि ईश्वर भक्ति के लिए मिला...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.