बागपत, जनवरी 11 -- रविवार को नगर की अजीत नाथ सभागार में धर्म सभा आयोजित की गई। जिसे संबोधित करते हुए आचार्य विमर्श सागर ने कहा कि गुण रहित मनुष्य व द्वार रहित मकान मिलना अत्यन्त कठिन है, लेकिन आज मनुष्य अपने गुणों को छोड़ चुका है। मनुष्य को दो गुण जन्म से ही प्राप्त हुए हैं। पहला मुस्कुराहट, दूसरा सिर का ऊंचा होना। उन्होंने मानव और मानवीयता का अंतर बताते हुए कहा कि मानव मिट्टी है, मानवीयता घड़ा है। मानवीयता आने के उपरान्त मनुष्य पात्र बन जाता है और वन्दनीय हो जाता है। 11बाग27 अजीत नाथ सभागार में प्रवचन सुनते जैन समाज के लोग

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