वाराणसी, अप्रैल 27 -- वाराणसी। मानव देह चौरासी लाख योनियों के बाद प्राप्त होती है। हमें इसे प्राप्त करके प्रभु को प्रत्येक क्षण स्मरण करते रहना चाहिए। यह शरीर सिर्फ खाने-पीने के लिए नहीं मिला। ये क्रियाएं तो पशुओं में भी होती है। परंतु उनमें विवेक नहीं होता। विवेक सिर्फ मनुष्य में होता है। ये विचार श्रीधाम वृंदावन से आए डॉ. संजय कृष्ण 'सलिल' ने व्यक्त किए। वह रथयात्रा स्थित कन्हैया लाल स्मृति भवन में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईश्वर की स्मृति लाभ जीवन में अभ्यास से होता है। हमें मृत्यु को याद करते रहना चाहिए। यह भी पढ़ें- परमात्मा की कृपा से ही सत्संग का अवसर मिलता है: डॉ त्रिपाठी जब तक हम अपने खान-पान एवं व्यवहार पर ध्यान नहीं देंगे तब तक हृदय शुद्ध नहीं होगा। जहां हृदय शुद्ध होता है वहीं प्...