बाराबंकी, मार्च 11 -- फतेहपुर। मानव जीवन में संगत की बहुत महिमा है। जो कैकई मैय्या राम जी को प्राणों से अधिक मानती थी, वही कैकई मंथरा की संगत में आकर राम जी के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती है। उक्त विचार स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज ने मंगलवार को श्रीराम कथा के छठे दिन नगर के मोहल्ला पचघरा स्थित ओम शिवालय रक्षाबन्धन मेला मैदान पार्क में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि कैकई ने मंथरा जैसे का कुसंग कर लिया। कुसंग से बुद्धि बिगड़ जाती है। केवट ने राम जी को गंगा पार कराया। यह भगवान व भक्तों के संगत का परिणाम है। आरती के बाद कथा का समापन हुआ। कार्यक्रम आयोजक राजीव नयन तिवारी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। हरनाम सिंह वर्मा, राजेंद्र तिवारी, महंत हेमंत दास, अभिमन्यु श्रीवास्तव, मुकेश त्रिपाठी, सरदार सतनाम सिंह, राजन तिवारी, मुन्ना तिवारी, सुरेश चंद...
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