नई दिल्ली, जून 9 -- Humanity is the greatest religion: नागपुरा गांव में कमलम्मा अपनी इकलौती बेटी कन्नम्मा के साथ रहती थी। एक बार उस गांव में अकाल पड़ा। उसने दुखी होकर अपनी बेटी से कहा, 'बेटी मेरा दुर्भाग्य देखो, मैं तुम्हें खाना भी नहीं दे पा रही हूं।' बेटी ने मां से कहा, 'मां आप चिंता मत करो, मैं बाहर से खाना मांगकर लाती हूं।' ऐसा कहकर कन्नम्मा भोजन की तलाश में घर से निकली। गांव के सभी घरों की यही हालत थी, इसलिए उसे किसी घर से कुछ नहीं मिला। दुखी होकर कन्नम्मा घर वापिस जाने लगी। तभी उसने एक औरत को पेड़ के नीचे रोटी पकाते हुए देखा। कन्नम्मा ने उसके पास जाकर कहा, 'मुझे खाने को रोटी दे दो। औरत ने एक रोटी कन्नम्मा को दे दी। कन्नम्मा ने औरत से कहा, 'मेरी मां भी भूखी है। अगर एक और रोटी मुझे देंगी, तो आपकी बड़ी कृपा होगी।' औरत ने उसे एक और रोटी...