नई दिल्ली, अगस्त 22 -- अपनी संतान को शिक्षित और स्वावलंबी बनते देखकर हर माता-पिता को गर्व होता है। होना भी चाहिए। चंद संततियों को छोड़ दें, तो बेटे-बेटी भी माता-पिता के त्याग और योगदान को ताउम्र याद रखते हैं। कभी आपने सोचा है कि उस प्रिंसिपल, शिक्षक या शिक्षिका को कितना फख्र महसूस होता होगा, जिसके कदमों में दो भूले-बिसरे कामयाब हाथ अचानक झुक जाते हैं? यह सम्मान ही तो उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। उत्तम टेरोन का जीवन ऐसे गर्वीले पलों से कभी रिक्त नहीं रहेगा। असम में एक जिला है कामरूप। इसी के पामोही गांव में आज से 50 साल पहले उत्तम पैदा हुए। पिता रेलवे में थे और मां गृहिणी। चूंकि पामोही गांव राजधानी गुवाहाटी से बहुत ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए उत्तम को पढ़ाई-लिखाई में स्कूल-कॉलेज को लेकर कोई खास दिक्कत पेश नहीं आई। हालांकि, करियर को लेकर उनका मार्...