बागेश्वर, फरवरी 25 -- अपनी 12 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर जिले की आशाएं आंदोलित हैं। मानदेय लागू नहीं करने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। साथ ही छह लाख का दुर्घटना बीमा देने और सेवानिवृत्ति पर एकमुश्त दस लाख रुपये देने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। आशा फेसिलिटेटर कार्यकर्ता संगठन के बैनर तले आशाएं बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंची। यहां नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आशाएं स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ हैं। गांव में रहकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। आशाओं के आने के बाद जिले समेत पूरे प्रदेश मातृ-शिशु मृत्त्यु दर में कमी आई है। कोरोना काल में उनकी भूमिका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सराहना तक की। इसके बावजूद सरकार उनकी ...