उरई, जनवरी 3 -- उरई। सावित्री बाई फुले ने अपने संघर्ष, साहस और संकल्प से इतिहास की धारा मोड़ने का कार्य किया। जिस दौर में महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार बंद थे, उस समय उन्होंने बालिकाओं के लिए विद्यालय खोलकर नारी सशक्तिकरण की नींव रखी। विधवा विवाह, महिलाओं के मातृत्व अधिकार, बलात्कार पीड़ित महिलाओं के भ्रूण के संरक्षण एवं परवरिश जैसे सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर उन्होंने समाज को नई दिशा दी। उनका योगदान आज भी प्रेरणास्रोत है। यह विचार कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी श्याम सुन्दर ने संत रविदास संस्थान के संस्थापक एपी भारती के 87वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए। यह गोष्ठी माता सावित्री बाई फुले को समर्पित रही, जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और सामाजिक सुधारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्...