सासाराम, मार्च 21 -- राजपुर, एक संवाददाता। आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां मनुष्य सुख-समृद्धि की खोज में इधर-उधर भटक रहा है, वहीं एक कड़वा सत्य यह भी सामने आ रहा है कि संतानें अपने उन सच्चे देवताओं (माता-पिता) को भूलते जा रहे हैं। जिनकी छाया में उन्होंने जीवन पाया है। उक्त बातें को राजपुर स्थित महिला महाविद्यालय के प्रांगण में हो रहे श्रीरामाश्रय सत्संग (च) आगरा शाखा के शिष्य श्रीलक्ष्मीकांत जी द्वारा सत्संग के दौरान शनिवार को कही। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म-ग्रंथ और संस्कृति सदैव यही सिखाते आए हैं कि माता-पिता से बढ़कर इस धरती पर कोई देव नहीं। फिर भी आजकल यह प्रवृत्ति बढ़ी है कि लोग अपने अहंकार और स्वार्थपूर्ण नीतियों के चलते माता-पिता की सेवा से मुंह मोड़ लेते हैं। वे मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारों और मठों के चक्कर तो लगाते हैं, लेकिन अपने ह...