नई दिल्ली, दिसम्बर 13 -- मध्यप्रदेश के बैतूल के परिवार अदालत में जज द्वारा दिए गए धार्मिक और नैतिक उदाहरणों ने बेटे को अपनी मां को भरण-पोषण राशि देने के लिए सहमत कर दिया। मामला उस समय परिवार अदालत पहुंचा, जब एक मां ने अपने बेटे के खिलाफ भरण-पोषण राशि प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया। बेटे का तर्क था कि वह अपनी मां को अपने साथ रखकर उसका पालन-पोषण करने को तैयार है, इसलिए अलग से भरण-पोषण राशि देना उसके लिए संभव नहीं है। वहीं मां का कहना था कि बहू का व्यवहार उसके प्रति ठीक नहीं है, जिसके कारण वह बेटे के साथ नहीं रह सकती। परिवार अदालत के जज शिवबालक साहू ने बेटे को धार्मिक संदर्भों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि माता-पिता संतान के लिए देवता के समान होते हैं। जैसे व्यक्ति मंदिर जाकर अपनी श्रद्धा से चढ़ावा चढ़ाता है, वैसे ही माता-पिता की सेवा...