डॉ. महकार सिंह, मार्च 11 -- अपनी संतान के लिए मौत मांगना कितना दर्दनाक होता है यह 31 साल के हरीश राणा के बूढ़े पिता के आंसू ही बता सकते हैं। जिस बेटे को उन्होंने इतने लाड-प्यार से पाला, इंजीनियरिंग कॉलेज की दहलीज तक पहुंचाया। बेटा भी टॉपर बनकर ऊंची उड़ान को तैयार था, पर एक हादसे ने उसे इस हाल में पहुंचा दिया कि मां-बाप ही बेटे के लिए इच्छा मृत्यु मांगने को मजबूर हो गए। हरीश के पिता ने कहा कि अब वह बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते हैं, जो 13 साल से बिस्तर पर है और उसके ठीक होने की सभी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। जिंदा होते हुए भी मरणासन्न अवस्था में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से हरीश राणा के माता-पिता बेटे के लि...
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