मुरादाबाद, मई 12 -- मुरादाबाद। अपने कलेजे के टुकड़े को हमेशा महफूज रखने के लिए जान लड़ा देने वाली मां की जान शिशु को जन्म देने के समय अब भी खतरे में पड़ रही है। तमाम गंभीर कोशिशें होने के बावजूद प्रसव के समय मां पर मौत के झपट्टा मारने का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। अलबत्ता, यह कम जरूर हुआ है। इसे खत्म करने के लिए जान लड़ा देने की जरूरत बढ़ी महसूस की जा रही है। मातृ मृत्यु दर के मामलों में कमी आई है, लेकिन, इसकी कालिख अभी मिटी नहीं है। उत्तर प्रदेश में मातृ मृत्यु दर पिछले पंद्रह सालों में 258 से घटकर 167 प्रति लाख पहुंची है। यानि प्रति एक लाख में 167 मांएं अब भी मौत के आगोश में समा रही हैं। मातृ मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसत 88 दर्ज किया गया है। जिसकी तुलना में यूपी में मातृ मृत्यु दर काफी अधिक है। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले उत्तर प्रदेश में...