देहरादून, मई 2 -- उत्तराखंड में एक बेबस मां के संघर्ष की जीत हुई है। सड़क हादसे में 18 साल के बेटे क्षितिज चौधरी की मौत के मामले में प्रेमनगर पुलिस की लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को अदालत ने खारिज कर दिया है। चतुर्थ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों की अदालत ने न सिर्फ मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं, लापरवाही से जांच में विवेचक (सब इंस्पेक्टर) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसएसपी को भी निर्देशित किया है। अदालत ने एफआर की पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि ललिता चौधरी ने अपनी आपत्ति में दुर्घटना करने वाले डंपर का नंबर और उसके मालिक का नाम स्पष्ट रूप से बताया था। इसके बावजूद एफआर लगाने वाले विवेचक अमित कुमार शर्मा ने इस दिशा में कोई जांच नहीं की। अदालत ने अपने आदेश में इसे अत्यंत आपत्तिजनक और कर्तव्यों के प्रति घोर ल...
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