वाराणसी, सितम्बर 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। मां कूष्माण्डा के शृंगार महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को भगवती का स्वर्ण शृंगार हुआ। एक तरफ संगीत समारोह में कलाकारों की प्रस्तुतियां होती रहीं। दूसरी तरफ मंदिर में अखंड भंडारा भी चलता रहा। स्वर्ण शृंगार के लिए शाम साढ़े चार बजे मंदिर का कपाट बंद हुआ।

स्वर्ण शृंगार की प्रक्रिया पं.कौशलपति द्विवेदी और पं.संजय दुबे ने मां के विग्रह को पंचामृत स्नान कराने के उपरांत लाल बनारसी साड़ी और लाल चुनरी धारण कराई। कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के फूलों से मां का शृंगार हुआ। इसके बाद मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार के साथ स्वर्ण रजत युक्त मोती की लड़ियों से भगवती को अलंकृत किया गया। संगीत समरोह की विराम निशा में 21 कलाकारों ने दरबार में हाजिरी लगाई।

कलाकारों की प्रस्तुति विख्यात ...