नई दिल्ली, सितम्बर 12 -- कहते हैं कि सफलता पाने के लिए त्याग और समर्पण का होना बेहद जरुरी होता है। इसका परफेक्ट उदाहण है राजस्थान के शाम सुंदर बिश्नोई की कहानी। इनकी कहानी किसी फिल्म की स्टोरी से कम नहीं है। इन्होंने ना सिर्फ बड़े अधिकारी बनाने का सपना देखा, बल्कि अपनी मां के ख्वाबों को पूरा करने के लिए ना जाने कितने त्याग किए। ये त्याग मामूली नहीं थे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के मैदान में जब श्याम सुंदर उतरे थे, तो कई बार सफलताएं हासिल हुई, लेकिन इनको अपनी मां का सपना पूरा करना था। इसलिए कई सरकारी नौकरियों को छोड़ दिया। आखिरकार आरएएस परीक्षा पास कर वो एसडीएम बनें। हालांकि आएएस की परीक्षा में वो 11 बार असफल हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। ऐसे में इनकी कहानी सिर्फ आरएस परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि जिद और जुनून की भी कहानी है,...