पूर्णिया, जनवरी 7 -- बिहार में नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही कमी अब केवल जल संकट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा और गहरा प्रभाव पर्यावरण, जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिले की प्रमुख नदियों और जल स्रोतों में पानी घटने से जहां जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व संकट में है, वहीं बदलते पर्यावरणीय हालात आम जनजीवन के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है। बिहार में पाई जाने वाली कई मछलियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। पूर्णिया के मत्स्य पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह के अनुसार पर्यावरणीय असंतुलन और मानसून के अनियमित व्यवहार का सीधा असर मछलियों की देशी प्रजातियों पर पड़ा है। एक समय पूर्णिया की नदियों और तालाबों में सहज रूप से मिलने वाली देशी मांगर, मच्छली, गैंचा (पटिया), सिधी, टेंगरा, सौरा गड़ई, दरही, रेवा और कुर्सा जैसी प्रज...
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