नई दिल्ली, अप्रैल 23 -- पुष्परंजन,वरिष्ठ पत्रकार सत्ता के अंतःपुर में जब आग लगी हो, तब समझदार नेता, जनता का ध्यान बंटाने के वास्ते कुछ ऐसे कारनामे कर जाते हैं कि बहस की दिशा दूसरी तरफ मुड़ जाती है। नेपाल में भी यही हुआ। जनता हैरान है कि अचानक नेपाली 100 रुपये से अधिक के भारतीय माल पर पांच से 80 प्रतिशत तक 'भंसार शुल्क' वसूलने का फितूर क्यों सवार हुआ? शासन की तरफ से तर्क दिया गया कि भारतीय सामानों की खरीदारी से हमारी अर्थव्यवस्था चौपट हो रही थी। ये खरीदार सुदूर पहाड़ के लोग नहीं थे, रोजमर्रा की जरूरतों वाले तराई के लोग थे। तराई वालों को इससे भी अधिक जोर का झटका सड़क चौड़ीकरण के नाम पर दिया गया। बीच सड़क से 25 मीटर दाएं और 25 मीटर बाएं रास्ता साफ करने का आदेश हुआ है। 48 घंटे के भीतर देखते-देखते जेबीसी मशीनों ने तराई के प्रमुख नगरों को मोहनजोदड़ो-...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.