मुंबई, अप्रैल 11 -- बॉम्बे हाई कोर्ट ने महिला को कथित तौर पर घूरने को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना अनैतिक व्यवहार है, लेकिन इसे ताक-झांक (Voyeurism) का अपराध नहीं माना जाएगा। जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि ऐसे काम नैतिक रूप से गलत हैं, लेकिन वे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354C के तहत कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। बता दें कि यह धारा ताक-झांक के अपराध को परिभाषित करती है और उसके लिए सजा तय करती है। इस धारा के तहत किसी महिला को कोई निजी काम करते हुए देखना, उसकी तस्वीरें लेना या उन तस्वीरों को फैलाना शामिल है। यह उस हालात में लागू होता है जहां शरीर के निजी अंग खुले हों, कोई महिला शौचालय का इस्तेमाल कर रही हो, या कोई ऐसा यौन कृत्य कर रही हो जो आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं किया ...