नई दिल्ली, अप्रैल 21 -- सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की बार एसोसिएशनों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर वे महिला वकीलों के लिए तय 30 प्रतिशत आरक्षण को लागू नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें मान्यता निलंबित करना भी शामिल है। अदालत ने साफ किया कि यह निर्देश केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे हर हाल में लागू करना होगा ताकि न्यायिक व्यवस्था में लैंगिक समानता सुनिश्चित की जा सके। यह भी पढ़ें- देश छोड़कर भागे नहीं जा रहे.पवन खेड़ा की अर्जी पर सिंघवी-AG में 3 घंटे तीखी बहस दरअसल, सुप्रीम कोर्ट पहले ही बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व अनिवार्य कर चुका है। इसमें 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के जरिए और 10 प्रतिशत सीटें को-ऑप्शन के जरिए भरने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने यह कदम इसलिए ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.