नई दिल्ली, मार्च 7 -- न्याय की खातिर अब 'चुप्पी' तोड़ रही हैं महिलाएं -राजधानी में कुल लंबित मामलों में से महिलाओं ने दायर किए हैं सात फीसदी मामले-देशभर की बात करें तो आठ फीसदी मुकदमे महिलाओं ने किए हैं दायरनई दिल्ली। निखिल पाठकसामाजिक दबाव, बदनामी का डर और पारिवारिक बंधनों के कारण लंबे समय तक अन्याय सहकर चुप रहने वाली महिलाएं अब अपनी खामोशी तोड़ रही हैं। अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए महिलाएं अब खुलकर बोल रही हैं। बदलती सामाजिक सोच, बढ़ती साक्षरता और कानूनी जागरूकता के चलते महिलाएं अब अन्याय, दर्द व नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हट रहीं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार, देशभर की अदालतों में लंबित 4,92,69,496 मामलों में से 38,87,295 मुकदमे महिलाओं द्वारा दायर किए गए हैं। यानी देश में लंबित कुल मामलों ...
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