रांची, सितम्बर 8 -- दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी की है। झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा है कि केवल रात में किसी महिला के घर में प्रवेश करना और उसके कपड़े उठाना भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दुष्कर्म करने या दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जा सकता। यह मामला 26 साल पुराना था। उच्च न्यायालय ने 26 साल पुराने मामले में दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के फैसले में बदलाव किया। साथ ही मामले को दुष्कर्म के बजाय महिला की गरिमा भंग करने तथा आपराधिक बल के इस्तेमाल का मामला माना। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि 'दुष्कर्म किए जाने के पर्याप्त रूप से निकट कोई करीबी प्रत्यक्ष कृत्य भी भारतीय दंड संहिता के तहत दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जाएगा।' प्रत्यक्ष कृत्य से मतलब अपराध करने की य...