नई दिल्ली, अप्रैल 17 -- आरती आर जेरथ,वरिष्ठ पत्रकार महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले संशोधन विधेयकों का यही हश्र होना था। संसद का यह विशेष सत्र संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक की मंजूरी के लिए बुलाया गया था, लेकिन विपक्ष को मना पाने में सत्ता पक्ष नाकाम रहा। नतीजतन इन संशोधनों पर बात नहीं बन सकी। इसका एहसास तभी हो गया था, जब गुरुवार देर रात कानून मंत्रालय ने महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को लागू करने की अधिसूचना जारी की। लोकसभा व विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को स्वीकार करने वाला यह अधिनियम 2023 में पारित किया गया था और इसी में संशोधन को लेकर हमारे सांसद बहस में उलझे हुए थे। इन संशोधनों के पारित न होने पर अधिनियम खुद-ब-खुद निरस्त हो जाता। बिल के पारित होने की संभावना शुक्रवार ...
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