गिरडीह, अगस्त 27 -- आज पूर्णिमा पर उमड़ेंगे शिवभक्त झारखंडीनाथ की शरण में पहुंचते हैं श्रद्धालु झारखंडधाम, प्रतिनिधि। देवाधिदेव महादेव की नगरी झारखंडधाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। कभी घने जंगलों और बीहड़ वादियों के बीच स्थित यह स्थल आज आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है।

रामायण और महाभारत की मान्यता मान्यता है कि रामायण काल में लंकाधिपति रावण और महाभारत काल में महान धनुर्धर अर्जुन ने यहां तपस्या कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया था। जानकारों के अनुसार तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अर्जुन को किरात यानी कोल-भील के रूप में दर्शन दिए और महाभारत युद्ध में विजय के लिए उन्हें पाशुपत अस्त्र प्रदान किया। मान्यता है कि इसी कारण झारखंडधाम में दो शिवलिंग विराजमान हैं। झारखंडधाम के इतिहास के मर्मज्ञ कांशी पंडा बताते हैं कि शिवपुराण में भी इस ...