पटना, अप्रैल 24 -- परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के अंतर में ही प्रतिष्ठित हैं। मन की माया उसे परमात्मा से दूर किए रहती है। परमात्मा को पाने के लिए आंतरिक-साधना ही एकमात्र साधन है। नियमित साधना से मन की वही माया नष्ट होती है और परमात्मा का दर्शन होता है। यह बातें शुक्रवार को इस्सयोग के संस्थापक महात्मा सुशील के 24वें महानिर्वाण महोत्सव में मां विजया ने कही। उन्होंने कहा कि इस्सयोग के रूप में महात्मा सुशील ने साधना की आंतरिक पद्धति दी है। इससे कर्मफल काटे जा सकते है। माया से मुक्त होकर मोक्ष पाया जा सकता है। 'अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज' के बैनर तले महोत्सव के दूसरे दिन 'गुरुधाम' में हवन-यज्ञ के बाद सदगुरुमाता मां विजया का प्रवचन हुआ। इस अवसर पर संस्था के उपाध्यक्ष (मुख्यालय) संजय कुमार ने कहा कि साधना से कठिन समय में भी हम आनन्द में रह सकते ह...
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