हेमलता कौशिक, दिसम्बर 16 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि महज शिकायतें दर्ज करना, भले ही बाद में वे झूठी पाई जाएं, अपने आप मानहानि का अपराध नहीं बन जाता है। अदालत ने एक मामले में फैसला देते हुए साफ किया कि मानहानि का मामला साबित करने के लिए यह दिखाना होगा कि आरोप प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से लगाए गए या इस जानकारी या विश्वास के साथ लगाए गए थे कि ऐसे आरोपों से प्रतिष्ठा को नुकसान होगा। पीठ ने एक कंपनी के निदेशक की याचिका खारिज कर दी। याचिका में चार महिला कर्मचारियों को मानहानि के अपराध से बरी करने को चुनौती दी गई है। उसने आरोप लगाया कि नौकरी छोड़ने के बाद महिलाओं ने मुवक्किल का गोपनीय डेटा और दस्तावेज चुरा लिए। फिर यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायतें दर्ज करके बदला लिया, जिसके परिणामस्वरूप चार प्राथमिकी दर्ज हुईं। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ...
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